नदी पारिस्थिकी की सुरक्षा में एक्शनएड द्वारा की गई पहल,

नदी पारिस्थिकी की सुरक्षा में एक्शनएड द्वारा की गई पहल,

टेल फाल पथलहवा में गण्डक नदी तट पर नदी तट समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर नदी की पारिस्थिकी पर चर्चा की गई जिसमें गण्डक नदी तट समुदाय के लोगों का कहना है कि नदी आज कोरोना महामारी में हमलोगों के लिए जीवन दायनी साबित हुई है आज हमलोग पूरी तरीके से नदी पर ही आश्रित है। हमारे घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए हम सभी लोग मछलियों को पकड़ कर बेचते हैं जिससे आजीविका चल रही है। इतना तो हमलोगों को विश्वास है कि नदी माँ हमें कभी भी भूखे मरने नहीं देती। उपेन्द्र शुक्ला का कहना है कि नदी को पुनर्जिवित करने के लिए एक्शनएड संगठन के माध्यम से जन जागरूकता और निरंतर आवाज उठाने का काम करता है। जल कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविद भारत के विभिन्न अंचलों में विभिन्न नदियों यथा गंगा यमुना नर्वदा कावेरी आदि के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर परिचर्चायें , सेमीनार तथा विचार विमर्श करते रहते हैं। राज्य और केंद्र सरकार इन नदियों को बचाने के लिए गंभीर दिखती नहीं है। प्राचीन साहित्य में नदियों को बड़े आदर व सम्मान से देखा जाता था। मनुस्मृति में जलप्रदूषण करनेवाले को मृत्यु देने की बात कही गई है। कुएं के पानी खारा होन के कारण क्षेत्र की अधिकांशतः जनता नदी जल पर ही आश्रित रहती थी। इसी कारण नदी के तटों पर सामन्तों व अमीरों ने अपनी हवेलियां, बाग और महल बनवा रखे थे। बाबर, अकबर तथा शाहजहां के पीने के पानी का मुख्य स्रोत नदियां ही होती थीं। मध्यकाल में यमुना नदी का जल मोतियों की तरह स्वच्छ, अमृत सा निर्मल रहता था। इसी कारण ताजमहल के लिए वर्तमान जगह का चयन किया गया है। शाहजहां के दरबारी कवि पण्डित राज जगन्नाथ ने गंगा और जमुना से सम्बन्धित गंगा लहरी और अमृत लहरी नामक काव्यों में 10-10 लहरियां लिख रखी है। यमुना को अमृत लहरी के रुप में महिमा मण्डन कर यमुना के महत्व को दर्शाया गया है। प्राचीन और मध्यकाल में यमुना में असीमित जल संचय रहता था। यह हमेशा बहते रहने के कारण स्वच्छ तथा तरोताजा रहता था। हमने वैज्ञानिक प्रगति व विकास के नाम पर इस पर बांध बनाकर अपनी बहुमूल्य संस्कृति का विनाश कर डाला है। अब तो यह सूखी रेखा जैसे हो गयी है। उल्टे इसमें गन्दे नालों को डालने से इसकी स्थिति बद से बदतर हो गई है। इसके जलचर बनस्पतियां सब के सब काल कवलित होती जा रही हैं। आगरा में यमुना नदी का सूखा हुआ तल ताज महल तथा अन्य नदी में तट पर स्थित स्मारकों की नींव पर गलत प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्टर न्यूज टीम।

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